Story

मेरी रोहिणी

थोड़ी देर तक हम दोनों इसी तरह एक दुसरे को मुस्कुराते हुए देखते रहे। एक अजीब सा सुकून था मेरे मन में। ऐसा लगा जैसे उन पलों में मुझे अपने हिस्से की सारी खुशी मिल गई थी। अब जीवन से कुछ और नहीं चाहिए था।

रुही का इंतजार

सारी रात मैंने आँखों में ही बिता दी। अगली सुबह मेरी आंखें ख़ून सी लाल थी। अब भी मैं बीच बीच में रुही को फोन लगा रहा था। पर हर बार फोन लगने से पहले ही कट जाता। इसी तरह कब सुबह से शाम और शाम से रात हो गई इसका मुझे पता ही नहीं चला।

पूनम की चाँदनी

मुझे यकीन था कि पूनम एक ना एक दिन मेरे पास ज़रूर वापस आएगी, इस लिए नहीं क्योंकि उसे मेरी ज़रूरत है, वह तो स्वयं ही एक आत्मनिर्भर और समझदार लड़की है उसे मेरी ज़रूरत नहीं, पर इस लिए क्योंकि वह जानती है कि मुझे उसकी कितनी ज़रूरत है।

The Beginning

In stories, it’s the author’s free will, he can have everything which he cannot have in his real life. That’s what motivates authors to write.

Prologue

It was so silly of me to think that I can create our destiny. I tried convincing her so hard that we are in each others’ destiny without even realising that we can’t create our destiny, we only uncover it.

दिल की बात

दो पल के लिए मैं जैसे पत्थर का बन गया। जब तक मुझे कुछ समझ आता रितिका के चेहरे पर एक हल्की सी मुसकान आ गई थी।उसके चेहरे को देख कर मेरे साँसें दुबारा चल पड़ी। शरीर में जैसे रुके हुए रक्त फिर से प्रवाहित होने लगे।

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